यह कहानी एक ऐसे इंसान की है, जिसने एक ऐसी सच्चाई देखी… जिसे देखना ही नहीं चाहिए था। परेश एक साधारण आदमी था। वह ऑफिस में लेट शिफ्ट करता था और हर रात एक सुनसान, वीरान रास्ते से होकर अपने घर जाता था। वह रास्ता हमेशा शांत रहता था — अंधेरा, सन्नाटा और बस हवा की आवाज़। सब कुछ सामान्य था… जब तक कि एक रात कुछ असामान्य नहीं हुआ।
लेकिन अगली रात फिर वही हुआ। उसी जगह… वही लड़की… वही मुस्कान। धीरे-धीरे यह एक रोज़ का सिलसिला बन गया। हर रात वह वहीं खड़ी मिलती, बस मुस्कुराती रहती। न कुछ कहती, न कोई हरकत करती — सिर्फ उसे देखती रहती।
एक रात परेश ने तय किया कि अब सच जानना ही होगा। उसने बाइक रोकी और साहस जुटाकर उसके पास गया। काँपती आवाज़ में उसने पूछा, “तुम… कौन हो?” लड़की ने कोई जवाब नहीं दिया। वह बस मुस्कुराती रही। फिर अचानक उसका चेहरा बदलने लगा। उसके होंठों के किनारों से खून बहने लगा, उसका गला जैसे किसी ने बेरहमी से काट दिया हो, और उसकी आँखों से लाल आँसू टपकने लगे। वह दृश्य इतना भयावह था कि परेश की सांसें थम गईं।
तभी उसने धीमी लेकिन साफ आवाज़ में कहा, “उन्होंने मुझे मारा था… मैं अभी ज़िंदा थी… उन्होंने मुझे जला दिया… अब मैं उन्हें ढूंढ रही हूँ…” उसके शब्दों में दर्द, क्रोध और बदले की आग थी।
अगले दिन परेश ने उस सड़क से जुड़ी पुरानी खबरें खंगालनी शुरू कीं। कुछ साल पहले की एक खबर ने उसके पैरों तले ज़मीन खिसका दी। तस्वीर में वही लड़की थी — वही चेहरा, वही मुस्कान। उसका नाम रूपा था। रूपा की मौत कोई हादसा नहीं थी। तीन लड़कों ने उसे मारकर ज़िंदा जला दिया था, क्योंकि वह उनके अपराधों की गवाह थी।
कुछ ही समय बाद अजीब घटनाएँ होने लगीं। पहला लड़का पेड़ से लटका हुआ मिला। दूसरा अपनी कार में जला हुआ पाया गया। तीसरा पागलपन में खुद को घायल कर बैठा और उसकी भी मौत हो गई। शहर में यह सब रहस्य बना रहा, लेकिन परेश जानता था कि यह संयोग नहीं था।
अब कहानी का आखिरी अध्याय बाकी था। परेश ने किसी को नहीं मारा था, लेकिन उसने उस रात सब कुछ देखा था। वह सच जानता था, फिर भी डर के कारण चुप रहा। उसने कभी पुलिस को कुछ नहीं बताया।
एक रात उसे सपना आया। रूपा उसके सामने खड़ी थी, लेकिन इस बार उसकी मुस्कान गायब थी। उसकी आँखों में ठंडा सन्नाटा था। उसने कहा, “मुझे मुक्ति चाहिए… लेकिन एक आखिरी इंसान बाकी है… जिसने सब देखा था, पर कुछ नहीं किया… वो तुम हो, परेश।”
अगली सुबह एक जली हुई लाश मिली। पहचान हुई — वह परेश था। जगह वही मोड़ था, जहाँ वह लड़की खड़ी दिखाई देती थी।
कहते हैं, आज भी देर रात उस रास्ते से गुजरने वालों को सफेद कपड़ों में एक लड़की दिखाई देती है। वह मुस्कुराती है… जैसे किसी का इंतज़ार कर रही हो। शायद अगला गवाह… जो सच देखेगा, पर कुछ नहीं करेगा।
अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो, तो अपना समर्थन ज़रूर दें। आपकी एक प्रतिक्रिया हमें और भी ऐसी रहस्यमयी और डरावनी कहानियाँ लाने की प्रेरणा देती है।
Please Subscribe our youtube channel for audio of this stories horror stories of ghost


