यह कहानी अब एक ममतामयी माँ के वीरांगना रूप की है। जब एक नन्हा बच्चा खतरे में होता है, तब एक माँ साधारण महिला नहीं, बल्कि साक्षात काली का रूप धारण कर लेती है।
वह रात किसी भयानक सपने जैसी थी। बाहर आसमान चीर देने वाली बिजली कड़क रही थी और मूसलाधार बारिश ने पूरे गाँव को अपनी चपेट में ले लिया था। संतोष की माँ, मीरा, पास के खेत से लौट रही थी, लेकिन रास्ते में आए पहाड़ी नाले के उफान की वजह से उसे घर पहुँचने में देर हो गई।
घर पर सन्नाटा था, लेकिन तभी एक खौफनाक परछाईं घर के आंगन में दाखिल हुई। वह एक विशालकाय, जंगली शिकारी कुत्ता था—आंखें खून जैसी लाल और जबड़ों से टपकती लार। भूख से पागल वह जानवर घर के खुले दरवाजे से सीधे उस कमरे की ओर बढ़ा जहाँ मीरा का नन्हा बालक अकेला पालने में सो रहा था।
ठीक उसी पल मीरा भीगी हुई हालत में घर पहुँची। जैसे ही उसने कमरे की ओर उस दैत्य जैसे कुत्ते को बढ़ते देखा, उसका कलेजा मुंह को आ गया। कुत्ता गुर्राते हुए बच्चे पर झपटने ही वाला था कि तभी मीरा बिजली की गति से बीच में कूद पड़ी।
उसके पास कोई हथियार नहीं था, बस ममता का साहस था। उसने पास पड़ी एक भारी लकड़ी उठाई और उस विशाल जानवर पर वार किया। कुत्ता जोर से चीखा और अब उसने अपना रुख मीरा की ओर मोड़ लिया। वह कुत्ता मीरा के कद से भी ऊंचा लग रहा था, लेकिन मीरा आज मौत से डरने वाली नहीं थी।
खूनी संघर्ष शुरू हुआ। कुत्ते ने मीरा के हाथ पर हमला किया, मांस चीर दिया, लेकिन मीरा ने हार नहीं मानी। उसने अपने जख्मों की परवाह किए बिना, अपनी पूरी ताकत झोंक दी और उस जानवर का गला दबोच लिया। उसकी आँखों में इस वक्त डर नहीं, बल्कि एक शेरनी जैसी दहाड़ थी। उसने उस भारी लकड़ी से कुत्ते के सिर पर इतना जोरदार प्रहार किया कि वह जानवर अधमरा होकर आँगन की ओर भागा और बारिश के अंधेरे में गायब हो गया।
लहूलुहान हालत में मीरा तुरंत अपने बच्चे के पास पहुँची। बच्चा डरा हुआ था और रो रहा था। जैसे ही मीरा ने अपने कांपते और खून से सने हाथों से उसे अपनी छाती से लगाया, चमत्कार हो गया। बच्चा माँ की खुशबू पाते ही एकदम शांत हो गया।
बाहर अभी भी बिजली कड़क रही थी, लेकिन घर के अंदर अब शांति थी। मीरा की आँखों से खुशी के आंसू बह रहे थे—वे आंसू उसके घावों के दर्द के नहीं थे, बल्कि अपने कलेजे के टुकड़े को सही-सलामत देख पाने के थे। उसने बच्चे के माथे को चूमा और उसे अपनी ‘ममता की ऊब’ (गर्मी) दी। वह नन्हा बालक अपनी रक्षक माँ की गोद में सुकून से सो गया।
कहानी का सार:
जब बात संतान की रक्षा की आती है, तो एक माँ यमराज से भी लड़ जाती है।
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